जब छोड़कर चली गई मां

खुली खिड़की मुझे आज भी याद है, वो काला दिन, जब मेरी मां ने सरकारी अस्पताल के बिस्तर पर अपनी मां (मेरी नानी) की बांहों में दम तोड़ दिया था। उस दिन मेरी मौसी, मामी, मेरी नानी और मैं, गुलूकोज की बोतल का खत्म होने का इंतजार कर रहे थे, उस पर निर्भर था मेरी का मां जीवन।... [पूरी पोस्ट]
writer Kulwant Happy

माँ

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[13 Sep 2009 08:53 AM]

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