श्राद्ध खिलाने के लिए खिलाओ रिश्वत

खुली खिड़की आज मैंने भी अपनी मां का श्राद्ध पाया, लेकिन खुद ही घर में खाया। सचमुच! यकीन नहीं आता होगा न। मुझे भी यकीन नहीं आ रहा था क्योंकि मां को पूर्वजों की रोटी खिलाते हुए देखा, किसी गरीब घर के बच्चों या परिवारजनों को। आज मेरी पत्नी बोली हम किसी पंडित पंडितायन... [पूरी पोस्ट]
writer Kulwant Happy

रिश्वत

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[18 Sep 2009 05:11 AM]

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