वह कुछ भी हो, साहित्य नहीं
जो करे उजाला नित्य नहींवो दीपक है, आदित्य नहींजिसमें जन का कुछ हित नहींवह कुछ भी हो, साहित्य नहीं...
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मुक्तक सामाजिक सद्भावना
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[31 Dec 2009 05:04 AM]



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