हँसते-मुस्कुराते

आलोक डाकू (ताऊ से)- सुन या तो तू अपनी जान देगा, या फिर वह सारा रुपया जो पोटली में दबाकर ले जा रहा है।ताऊ (डाकू से)- नहीं जी, तुम मेरी जान ही ले लो, रुपया तो मैंने बुढ़ापे के लिए रख छोड़ा है।ताऊ (भाटिया जी से)- मैं बचपन में बहुत ताकतवर था..भाटिया जी (ताऊ से)-... [पूरी पोस्ट]
writer आलोक सिंह

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[03 Aug 2009 11:48 AM]

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