Main paristitiyua ka gulam nahi
विपरीत परिस्तितिया,हर किसी के जिंदगी में आती हैं,किसी के मुकदर में कम,किसी के मुकदर में जादा,हर परिस्तिति का अपना ही मजा हैं,कोई हँस के उड़ा देता हैं,कोई रो के परेशान होता हैं,हम तो मजा lete hai,uske sath do- do haath kar ke,use harne ki kosis kar ke,koi...
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"Azad Sikander"
meri kavitaye
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[18 Sep 2009 12:48 PM]



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