भारतीय नारी (राजस्थान साहित्य अकादमी की मधुमती पत्रिका मई 2009 में प्रकाशित)
एक सब्ज़ीवाली नित दोपहर मालती के घर की कालबैल बजाती। ‘‘बीवीजी! कुछ सब्ज़ी लेंगीं ?’’मालती-‘‘नहीं! अभी नहीं चाहिए।’’सब्ज़ीवाली-‘‘कुछ तो ले लो, हम दो कोस चलकर यहां आतीं हैं सब्ज़ी बेचने के वास्ते। अच्छा न लेयो तो पानी ही पिलाय देओ।’’मालती पानी देते...
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रचना गौड़ ’भारती’
लघु कथा
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[06 Aug 2009 09:03 AM]



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