मुरली तेरा मुरलीधर 18
अपनी ही विरचित कारा में बंधा तड़पता तू मधुकर अपनी ही वासना लहर से पंकिल किया प्राण निर्झर उस प्रिय की कर पीड़ा हरणी चरण कमल की सुखद शरण टेर रहा है प्रीतिपंकिला मुरली तेरा मुरलीधर।।101।।गीत वही तेरे अधरों पर स्वर उसका ही...
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हिमांशु । Himanshu
murali tera muralidhar
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[20 Sep 2009 07:51 AM]



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