सब याद है

हिमाल : अपना-पहाड़ ज़िंदगी के उन पुराने पन्नों मेंतुम भी होतुम्हारी यादें भीसारे पल सिमटे हैंकविता की शक्ल मेंचंद शेरों मेंतुम्हारे होने का अहसास है।।कुछ हंसते पल हैंकुछ बिखरते आंसू खूशबू है तुम्हारे होने का अहसास दिलाती हैज़िंदगी के उन पुराने पन्नों में ।। तुम हंसी बनकर... [पूरी पोस्ट]
writer जितेंद्र भट्ट

मेरी रचना

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[31 Jul 2009 11:10 AM]

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