उनकी नीली आँखों में अनगिनत किरणों की रौशनी....

काहे को ब्याहे बिदेस.... समुद्र कि लहरें उनके पाँव को चारों तरफ से चूमती हैं..उनकी घुटनों तक मुडी जींस को छू कर लौट जाती हैं उन्हें दोबारा भिगोने के लिए ... समुद्र ने सूरज को अपने भीतर छुपाने से पहले हाथों में ऊपर उठा रखा है ताकि सब उसे गौर से देख लें...आज की तारीख का सूरज देखने... [पूरी पोस्ट]
writer neera
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[18 Sep 2009 02:49 AM]

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