क्या विराम दूँ अभिव्यक्ति को?

जीवन के पदचिन्ह क्यों मन में एक शून्य हैं पनपा, क्या विराम दूँ अभिव्यक्ति को?न पाषाण हूँ, न मैं कोई बुद्ध, न पक्ष में, न मैं किसीके विरूद्व।क्यों फ़िर हृदय-संवेदना च्युत, सिर्फ़ शून्य! प्रवाह सभी अवरुद्ध।।न मुझे कामना की प्यास , न मुझे निर्वाण की कोई... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

चिंतन

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[08 Oct 2009 15:47 PM]

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