उस कच्चे रास्ते पर ...
एक शून्य सा फैला है कुछ मटमैला.... कुछ धूसर....टील्हे खाई पत्थर अटके पानी और कटरंगनी की झाड़ियों के बीच देसी दारु की गंध में लिपटा उस कच्चे रास्ते पर ... उस पार बस्ती है मगर वह एक द्वीप है कच्चे रास्तों से घिरा पहाड़ टूटते हैं और हाईवे पर बिछते हैं कच्चे...
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sandhyagupta
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[08 Sep 2009 13:00 PM]



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