दिल अगर फूल सा नहीं होता...
कुछ दिन पहले जनाब सतपाल जी के बज्म में एक तरही का आयोजन किया गया था ... उसमे इस अदने ने भी कुछ एक शे'र कहने की कोशिश की थी चूँकि मैं अभी सिखने की प्रक्रिया में हूँ तो गलतियाँ मुआफ करने की गुजारिश आप सभी से करूँगा ... मिसरा-ए-तरह था दिल अगर फूल सा नहीं...
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"अर्श"
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[10 Sep 2009 11:16 AM]



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