आत्मा घर बदल रही होगी.

मा पलायनम ! दीप की लौ मचल रही होगीरूह करवट बदल रही होगी |रात होगी तुम्हारी आंखों मेंनींद बाहर टहल रही होगी ||चैन सन्यास ले लिए होगापीर टाले न टल रही होगी |तुम चिता देख कर न घबराओआत्मा घर बदल रही होगी||जगमगाती है उनकी आँखे तोरोशनी दिल में पल रही होगी |यह जो खुशबू है... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. मनोज मिश्र
views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[29 Jul 2009 21:14 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix