आत्मा घर बदल रही होगी.
दीप की लौ मचल रही होगीरूह करवट बदल रही होगी |रात होगी तुम्हारी आंखों मेंनींद बाहर टहल रही होगी ||चैन सन्यास ले लिए होगापीर टाले न टल रही होगी |तुम चिता देख कर न घबराओआत्मा घर बदल रही होगी||जगमगाती है उनकी आँखे तोरोशनी दिल में पल रही होगी |यह जो खुशबू है...
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डॉ. मनोज मिश्र
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[29 Jul 2009 21:14 PM]



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