अल्पजन हिताय अल्पजन सुखाय

समुत्कर्ष भारतीय संस्कृति के अनुसार ``बहुजन हिताय बहुजन सुखाय´´ अर्थात अधिक से अधिक लोगों का हित हो और अधिक से अधिक लोग सुखी हों, ``वसुधैव कुटुंबकम´´ अर्थात सारा विश्व एक कुटुंब है अत: सर्वे भवंतु सुखिन:´, `सर्वे संतु निरामय:´ अर्थात विश्व के सब लोग सुखी और... [पूरी पोस्ट]
writer कन्हैया

भ्रष्टाचार

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[02 Sep 2009 03:43 AM]

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