अरे गाँधी की संतानों तुम्हारा खून है ठण्डा!

समुत्कर्ष उधर कश्मीर मैं उठता है पाकिस्तान का झंडा !इधर जम्मू की लाचारी, खाए फौज का डंडा !!तुम्हे लानत है गर तुम्हारा खून ना खौले, अरे गाँधी की संतानों तुम्हारा खून है ठण्डा! क्यों हुर्रियत के इशारों पर मौन है दिल्ली! क्यों जननी वीर सिंहो की बनी भीगी हुई बिल्ली !... [पूरी पोस्ट]
writer कन्हैया

कविता

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[22 Sep 2009 11:39 AM]

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