मैनें गुजरा हुआ कल देखा है!
मैने गुजरा हुआ कल देखा है। लम्बी-लम्बी ट्रेन में, दिल दुखता अहसास देखा है,बिना पांव फैलाए यात्रा का दीदार देखा है। जहाँ आपका सामान भी बन जाये आप पर मुसीबत साथ लाये खाने का इंतजार देखा है।।मैनें गुजरा हुआ कल देखा है।किसी की पोटली में चुड़वा और दही देखा है...
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कन्हैया
कविता
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[22 Sep 2009 23:57 PM]



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