साल का विदाई गीत
यह शहर है और मैं मुसाफिरमेरी पीठ पर लदे बैग में,एक लड़की की मुस्कुराहट,थोड़ी सी भूख,थोड़ा सा लालच,कुछ खंडित से ख्वाब,थोड़ी सी शराबलिए घूम रहा हूं।एक ही शहर मेंअठारह बरस जवानी के चले गए,लड़कियां मिली पर एक भी ऐसी नहींकि दिल से कहूं, हां, यही है।फाके के...
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ramkumar singh
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[31 Dec 2009 04:42 AM]



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