तसव्वुर

फुरसत के रातदिन युंही कभी मुझे तुझ पर यकीं नहीं होतायुंही कभी तेरी हस्ती सराब लगती हैकि जैसे तू मिरी जाना मिरा तसव्वुर है कि जैसे तू मिरी जाना मिरा तसव्वुर है ..तेरे गुदाज़ बदन की जो ये इबारत हैयही गुमान है बस मेरी ही मुहब्बत हैजो रंग मेरी निगाहों से भी झलकते हैंये और... [पूरी पोस्ट]
writer अभिषेक'शफक़'
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[18 Sep 2009 02:47 AM]

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