एक स्वागत गीत : नववर्ष तुम्हारा अभिनन्दन .....

हँसते रहो हँसाते रहो हे आशाओं के प्रथम दूत ! नव-वर्ष तुम्हारा अभिनन्दन सौभाग्य हमारा है इतना इस संधि-काल के साक्षी हैं जो बीता जैसा भी बीता पर स्वर्ण-काल आकांक्षी है यह भारत भूमि हमारी भगवन ! हो जाए कानन-नंदन नव-वर्ष तुम्हारा............ ले आशाओं की प्रथम किरण हम करें नए... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द पाठक
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[31 Dec 2009 01:17 AM]

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