यह व्यवस्था तुम्हें मार नहीं डालना चाहती
'श्रम के घंटे और मनुष्य का अवकाश' लेख की यह तीसरी और अंतिम किश्त।यह कुछ बड़ा अंश है। लेकिन आशा है कि इसे धीरजपूर्वक पढ़ लिया जायेगा।जीवन-स्तर और जीवन की गुणवत्ताजो लोग तर्क देते हैं कि यदि वे अपना कार्यालयीन काम छोड़कर जाएँगें तो अगले दिन वही काम करना तो...
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कुमार अम्बुज
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[20 Oct 2009 02:24 AM]



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