कैसे खो दूँ मैं तुझे
एक बड़ी ही प्यारी मित्र ने कुछ ऐसा किया जो हमारे रिश्तों में कडुवाहट घोलने के लिए काफी था | ऐसे वक़्त में कुछ इन पंक्तियों से ख़ुद को समझाया |
आँसू आ के रुक गयाआँख की कोरों पर कैसे नाराज हो जाऊँमैं तुझ से गैरों की तरहदुःख तो होता हैतेरी बेरुखी परकैसे खो...
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शारदा अरोरा
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[27 Aug 2009 01:20 AM]



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