दर्द
संसार चक्र की नियति है , इंसान जन्म लेता है , किशोर ,युवा , प्रोण और फ़िर वृद्ध हो कभी शतायु हो , कभी अल्पायु हो इस जीवन भ्रम को जीता हुआ मुक्त हो जाता है और कभी फ़िर से इस पृथ्वी लोक में जन्म ले भवसागर पार करने का प्रयास करता है ।हम सभी लोग युवा होते...
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Renu Sharma
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[13 Sep 2009 09:27 AM]



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