31 दिसंबर की रात
यह कहानी पिछले साल लिखी थी। आज 31 दिसंबर के दिन अपने दोस्तों और पाठकों के बीच इसे प्रस्तुत करते हुए थोड़ी झिझक हो रही है। वजह यह कि ब्लॉग पर पहली बार अपनी कहानी दे रहा हूं। पता नहीं पाठकों को पसंद आएगी कि नहीं। बाहर बारिश हो रही है। पड़ोस में कहीं तेज...
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प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi
एक कहानी
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[31 Dec 2009 00:31 AM]



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