अभिभूत हूं

दिमाग की हलचल सात सितम्‍बर को मेरा जन्‍मदिन था। जब पच्‍चीस साल का हुआ था तो लगा था कि बहुत बड़ा हो गया। तब से हर बार वर्षगांठ आने पर लगता कि अरे अभी तक कुछ किया भी नहीं और चौथाई जिंदगी निकल गई। आस-पास का माहौल भी कुछ ऐसा ही था। सो लगता कि जन्‍मदिन आने का मतलब है बहुत... [पूरी पोस्ट]
writer सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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[08 Sep 2009 23:30 PM]

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