विष और अमृत दोनों ही हैं शामिल मेरे गीतों में
आज हिंदी-दिवस है। हिंदी-दिवस की सार्थकता लंबी-चौड़ी बयानबाजी में नहीं है इसलिये बेहतर है हिंदी में कुछ लिख-पढ़कर इसे मनाया जाये। तो आज पेश है ये गीत आपकी सेवा में, जीवन के विरोधाभासों को समेटे हुये। मैं विध्वंस और सृजन दोनों को जरूरी मानता हूं। खेत से...
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रविकांत पाण्डेय
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[14 Sep 2009 12:43 PM]



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