संदेशा
कितनो की तकदीर बदलनी है |कितनो को सही रास्ते पर लाना है|अपनी हाथ की लकीरॊ कॊ मत देखो |तुम्हे तो लकीरो से भी आगे जाना है |हमारे आंसू पोछ कर वो मुस्कराते है|अपनी इसी अदा से बो दिल को चुराते है|हाथ उनके छू जाये हमारे चेहरे को|इसी उम्मीद मेहम बार बार खुद को...
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संजय तिवारी ’संजू’
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[28 Jul 2009 06:07 AM]



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