जिदंगी
जिदंगी को ऎसी कलपना समझॊ ,रात कॊ सच सुबह कॊ सपना समझो ।भुलाना चाह्ते हो अगर सभी जख्मो को,तो जिंदगी मे किसी को अपना समझॊ ।...
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संजय तिवारी ’संजू’
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[16 Sep 2009 01:15 AM]



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