उल्लुओं से क्षमा याचना सहित...
एक पुरानी कहावत है कि 'जिस बाग़ में एक भी उल्लू डेरा डाल ले वो बाग़ सूख जाता है'। एक शेर अर्ज़ है - बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी है,हर शाख़ पे उल्लू बैठा है, अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा....
[पूरी पोस्ट]
हर्ष प्रसाद
पंडित
7
0
0
0
0
[23 Aug 2009 02:46 AM]



Shuffle








