मेरा मन

मवार्क  (MAVARK  ) पोस्‍ट नंबर 15मैं (मेरा मन) तुम्‍हारे शहर सेकोरा लौट रहा हूं। मुझे कोई छू न सका, पा न सका सब के सब व्‍यस्‍त थे अपने में सब के सब मस्‍त थे केवल अपने में। फिज़ा में रश्‍क था, रंज था, खुशी थी - बेखुदी थी, किसी के दामन के दो चार बूंद आंसू भी अफसोस है कि मेरे... [पूरी पोस्ट]
writer MAVARK

कविता

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[08 Aug 2009 11:04 AM]

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