चलो कहीं चलते हैं...

KISHORE CHOUDHARY चेतक सर्किल से कुछ फर्लांग की दूरी पर एक चौड़ी गली में हम वीडियो कोच बस की प्रतीक्षा कर रहे थे. पददलित सड़कें अपने काले रंग में उघड़ आई थी और दूर खड़े पहाड़ों का अँधेरा आस पास बने छोटे छोटे घरों की चिमनियों को हराने में लगा था. दिन इस कदर थक चुका था कि... [पूरी पोस्ट]
writer Kishore Choudhary

दिल-ए-नाकाम

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[24 Dec 2009 03:14 AM]

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