एक पुराना मौसम, एक पुरानी नज़्म...
Above song is one of my favourite song, and may be the inspiration for the following as well:रात ये बुझने न पाए , जुगनूँ संभालिये,चाँद को आँखों में रख के दिन निकालिए ।रात आखिर रात है, पलकों में खो जानी है ,और शामें रोज़ थक के यादों में सो जानी है । ये...
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darpan sah
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[28 Dec 2009 12:06 PM]



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