...मुझपे उधार रहे.

प्राची व उसके पार... आज कुछ रिश्तों से पुराना हिसाब हो , चलो !!प्रिये ,मैं आज वापिस करता हूँ तुम्हारी 'एक आंसू' की मुस्कान ,दे दो तुम भी मुझे मेरे बालों से बनी गोल -गोल अंगूठियाँतुम्हारी हर बात की चिंगोटीयाँ मगर उधार रही .दोस्त,वो रंगीन महफिलें याद हैं मैंने तुम्हें दी... [पूरी पोस्ट]
writer दर्शन

darpan sah

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[28 Dec 2009 12:01 PM]

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