साथी घर जाकर मत कहना...
यह कविता १९९४-९५ में मेरे शहीद भाई के मेरठ स्थित आर्मी स्कूल की वार्षिक किताब प्रतिभा में छपी थी... तब उसने मुझे वो किताब भेंट दी थी... यह कविता किसी नीलम जी ने लिखी है...जो उस समय छठी कक्षा में पढ़ती थी... जो में आप सबसे बाँट रहा हूँ..खास कर यह मैंने...
[पूरी पोस्ट]
मीत
13
0
0
0
9
[31 Dec 2009 03:55 AM]



Shuffle








