स्वप्न से अनुराग कैसा .......
स्वप्न से अनुराग कैसाकल्पनाओं का सफर हैभावनाओ का समर हैहै क्षणिक उन्माद नयनों का,नही ये सत्य जैसास्वप्न से अनुराग कैसाविषमताओं से भरा हैह्रदय को इसने छला हैनीद के हाथो विनिर्मित ,गीत का यह भाव कैसास्वप्न से अनुराग कैसाभाग्य कब इससे बना हैकर्म न इससे जनां...
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vikram7
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[10 Aug 2009 10:03 AM]



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