चलो आज कुछ नया करे हम

vikram7 चलो आज कुछ नया करे हमइसी पुराने तन को धर करसडे घुने से मन को लेकरजीवन की अन्तिम बेला मे,आज नया प्रस्थान करे हमचलो आज कुछ नया करे हमवही शशंकित आशाये धरघने पराये पन से डर करसासों की इस पगडन्डी से,हट कर कोई राह चुने हमचलो आज कुछ नया करे हमतृप्ति कहाँ होती... [पूरी पोस्ट]
writer vikram7
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[14 Aug 2009 05:09 AM]

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