आ फिर राग बसंती ..........
आ फिर राग बसंती छेड़े
है विहान भी रंग ,रंगीला
मलय पवन का राग नशीला शरमाई सी मुझको तकती,तेरे नयनों को अब छेड़े
आ फिर राग बसंती छेड़े
कितने मधु-रितु ,साथ पुराना
सुखद बहुत ये ,साथ निभाना
तेरे मदमाते अधरों के,जाम अभी भी मुझको छेड़े
आ फिर राग बसंती छेड़े
ईश विनय,...
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vikram7
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[20 Aug 2009 14:45 PM]



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