सच नही कोई परिंदा, जाल मे फँस जायेगा ...
सच नही कोई परिंदा, जाल मे फँस जायेगाकर हलाले-पाक उसको चाक कर खा जायेगारख जुबाँ फिर भी यहाँ तू , बे-जुबाँ हो जायेगादेखकर शमसीर यदि तू , सच नहीं कह पायेगादिल्लगी में दिलकशी हो , दिल कहाँ फिर जायेगाप्यार और नफरत में यारा , फर्क क्या रह जायेगाप्यार अपने...
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vikram7
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[23 Aug 2009 05:46 AM]



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