आ कुछ दूर चलें,फिर सोचे.......
आ कुछ दूर चलें,फिर सोचेंअमराई की घनी छाँव मेंनदी किनारे बधीं नाव मेंबैठ निशा के इस दो पल में,बीते लम्हों की हम सोचेंआ कुछ दूर चलें,फिर सोचेंमन आंगन उपवन जैसा थाप्रणय स्वप्न से भरा हुआ थातरुणाई के उन गीतों से,आ अपने तन मन को सीचेंआ कुछ दूर चलें,फिर...
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vikram7
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[24 Aug 2009 03:38 AM]



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