आ साथी,अब दीप जलाएँ ......
आ साथी, अब दीप जलाएँलगी निशा होने है, गहरीघोर तिमिर होगा अब प्रहरीअपनी अभिलाषाओं को फिर से,निंद्रा-पथ की राह दिखाएँआ साथी, अब दीप जलाएँहै पावस की रात अँधेरीघन-बूँदों की सुन कर लोरीशायद नीड़-नयन में लौटे,हमसे रुठी कुछ आशाएँआ साथी,अब दीप जलाएँआयेगी उषा की...
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vikram7
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[25 Aug 2009 12:19 PM]



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