दे पिला अब .........

vikram7 दे पिला अब शाकिया,रंग शाम के भर जाम में जाने कब वो मांग बैठे,खूने दिल पैगाम में जिन्दगी का हॆ वजू, जीने के इस अंदाज मेंइक शमां बन कर जले, गर दूसरो की राह मेंसाज कोई लय नहीं हैं ,लय बसा हर साज मेंहर नई सुबहो छिपी हैं ,इक गुजरती रात मेंहैं मुझे भी देखना,... [पूरी पोस्ट]
writer vikram7
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[28 Aug 2009 14:55 PM]

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