कहाँ गये हैं, ये काले घन.......

vikram7 कहाँ गये हैं,ये काले घन वह वर्षा ,बूदों की टपटप द्रुत लहरीले जल की कलकलग्वाले की बाँसुरी सुनाती ,नही कोई अब प्यारी सी घुनकहाँ गये हैं,ये काले घनगान कहाँ हैं ,घन गर्जन केचिहुँक न सुनते खग-शावक केनभ में नही दमकती दामिनि,कहाँ गई जो थी घन की धनकहाँ गये हैं... [पूरी पोस्ट]
writer vikram7
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[02 Sep 2009 05:11 AM]

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