जाल के उस पार.......

अरे बिरादर !! आज की मनहूस सुबह ने मुझे जि‍स पीड़ा और ग्‍लानि‍ से भर दि‍या कि‍ शायद ईश्‍वर भी मुझे माफ न करे। मेरे फ्लैट की खि‍ड़की के साथ करीब आठ फुट लंबा और दो फि‍ट चौड़ा चबूतरा बना हुआ है। इसी खि‍ड़की के ऊपर ए.सी. टंगा हुआ है। ‍आज सुबह छ: बजे उठ कर खि‍ड़की के पास... [पूरी पोस्ट]
writer जितेन्द़ भगत

बस यादें रह जाती हैं

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[22 Sep 2009 00:45 AM]

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