दर्द को दिल में उतर जाने दो.......

vikram7 दर्द को दिल में उतर जाने दोआज उनको भी कहर ढाने दोरात हर चाँद से होती नहीं मसरुफे-सुखनस्याह रंगो के नजारे भी नजर आने दोएक अनजानी सी तनहाई, सदा रहती हैआज महफिल में उसे नज्म कोई गाने दोजिनने दरियाओं के मंजर ही नहीं देखे हैंउन सफीनो पे-भी अफसोस जरा करने... [पूरी पोस्ट]
writer vikram7
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[09 Sep 2009 02:28 AM]

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