उम्र को पीछे छोड़ देने की चाहत

कवितायन सारे,घर को नचाने वालीजिससे पूछे बिना एक पत्ता भी ना हिलता होआंगन मेंया जिससे दर्पण, समर्पण कर बैठा होजब खडी होती हैमॉल्स में किसी कॉस्मेटिक काऊंटर परठिठकी सीबेचारी लगती हैसेल्सगर्ल,अपना काम बडी ही खूबी से कर रही होती हैएक सपना सजों देने काउसकी आंखों... [पूरी पोस्ट]
writer मुकेश कुमार तिवारी
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[29 Jul 2009 03:09 AM]

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