टारगेट के पीछे भागते
आज,फिर पूरा दिन गुजर गया टारगेट के पीछे भागते दिन है कि जैसे पूरा था ही नही अधूरा सा दिन बस पलों में सिमट आया धुंधलके में टारगेट वहीं था और हमारे बीच दूरियाँ रात की तरह गहराती जा रही थी सारा,सामर्थ्य झोंक कर भी मैंविफलता के साये में ढूंढ रहा था कोई सुकून...
[पूरी पोस्ट]
मुकेश कुमार तिवारी
8
0
0
0
0
[18 Aug 2009 09:54 AM]



Shuffle








