बहस

कवितायन किसी,मुद्दे पर जारी बहसजब छोडती है बौद्धिक स्तर कोतो उतर आती है तू तू-मैं मैं परऔर फिर हाथापाई परकोई कभी भी और कहीं से भी भाग लेने लगता है बहस मेंजैसे किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में चढते उतरते हैं लोगमुद्दे का गद्दापहले बदलता है तकिये मेंअंततः हवा मे़ उडने... [पूरी पोस्ट]
writer मुकेश कुमार तिवारी
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[26 Aug 2009 01:41 AM]

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