तुम क्यों नही पैदा करती कोई नाद?

कवितायन तुम, आँखों में झांकते हुयेपढ़ लेती हो विचारों को इसके पहले कि वो बदल सकें शब्द मेंशब्दों को जैसे पहचान लेती हो तुम्हारे कानों तक पहुँचने के पहले और अपनी पूरी ताकत झोंक देती हो उस शब्द को बेअसर करने के लिये तुम,रोक देना चाहती हो कि शब्द बदल सकें पानी में... [पूरी पोस्ट]
writer मुकेश कुमार तिवारी
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[25 Sep 2009 09:24 AM]

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