तेरे आने से

zakhm कभी मिलोगी?साँस छूटने से पहले मुझसेपकडोगी हाथ मेरामौत का हाथ पकड़ने से पहलेबस इतनी सी इल्तिजा हैइक नज़र देख लूँ तुमकोऔर सुकून की नींद सो जाऊँफिर न जगाने आए कोईकब्र पर मेरीकोई फूल भी न चढायेतमाम हसरतें, आरजुएंइक दीदार के साथतमाम हो जाएँगीमेरा उम्र भर का... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[27 Sep 2009 01:31 AM]

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