बाँध लो मुझे
बाँध लो मुझे,नहीं चाहिए छुटकारा। खींच लो मुझे ,अपने अंदर,अतल गहराइयों में,कि चाह कर भी न उबर सकूँ। छू लो मुझेइस तरह कि पिघल जाए मेरा अस्तित्वकिसी तरल जैसा,और बूँद बूँदसमाहित हो जाए तुममे ही। उड़ जाएँभाप बनकर,मेरी सारी दूसरी इच्छाएँ । ढँक लो मुझेइस तरहकि...
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प्रताप नारायण सिंह
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[30 Jul 2009 00:28 AM]



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