दर्दे मोहब्बत भी दिलकश ही तो होता है
तनहाई के आँचल में कुछ यादें पिरोता हैयह दर्दे मोहब्बत भी दिलकश ही तो होता हैजब रात के साए में, है चाँद जवाँ होताइक बीता हुआ लम्हां कुछ ख्वाब सँजोता है"वे" नर्म बिछौनो पर करवट ही बदलते हैं"वो" सख्त जमीं पर भी बेसुध होके सोता है"जीने के नहीं काबिल दुनिया...
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प्रताप नारायण सिंह
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[03 Sep 2009 00:42 AM]



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